बिहार के औरंगाबाद में भूमि अधिग्रहण मामले को लेकर अदालत ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रथम डॉ. दीवान फहद की अदालत ने मुआवजा भुगतान में अत्यधिक देरी और न्यायालय आदेश की अवहेलना पर जिला कलेक्ट्रेट (समाहरणालय) की कुर्की का आदेश जारी किया है।

यह मामला नहर निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन से जुड़ा है, जिसमें डिक्रीधारी हरे कृष्ण प्रसाद को अब तक मुआवजा नहीं दिया गया। अदालत ने अपने पूर्व आदेश के अनुपालन के लिए प्रशासन को पर्याप्त समय दिया था, लेकिन भुगतान की स्पष्ट तारीख नहीं बताई गई।

अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट के नाजिर को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर कुर्की की कार्रवाई कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें। इस आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

सरकारी अधिवक्ता बृजा प्रसाद सिंह ने बताया कि शो-कॉज नोटिस के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी कारण अदालत को सख्त आदेश पारित करना पड़ा।

मामले की अगली सुनवाई 09 मार्च को निर्धारित की गई है। वहीं, औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा है कि कोर्ट आदेश की प्रति मंगाई जा रही है और विधि शाखा से राय लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब सबकी निगाहें 09 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं—क्या प्रशासन तय समय के भीतर मुआवजा देगा या कलेक्ट्रेट की कुर्की की कार्रवाई आगे बढ़ेगी?
