देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ मंदिर में परंपरागत हरिहर मिलन महोत्सव को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से दो मार्च से पांच मार्च तक होली महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक कार्यक्रमों की विस्तृत व्यवस्था की गई है।

जानकारी के अनुसार, फाल्गुन मास में आयोजित होने वाला यह महोत्सव देवघर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। हरिहर मिलन के अवसर पर भगवान शिव और भगवान विष्णु के मिलन की प्रतीकात्मक झांकी निकाली जाती है। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा तथा रंग-गुलाल के साथ भक्तगण उल्लासपूर्वक होली उत्सव में भाग लेंगे।

मंदिर प्रशासन ने बताया कि महोत्सव की शुरुआत विशेष विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होगी। इसके बाद डोली यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा को मंदिर से नगर भ्रमण के लिए ले जाया जाएगा। विभिन्न चौक-चौराहों पर श्रद्धालु आरती उतारकर और माल्यार्पण कर स्वागत करेंगे। पारंपरिक वाद्य-यंत्रों और भजन-कीर्तन के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहेगा।

पांच मार्च को होलिका दहन के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के देवघर पहुंचने की संभावना है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन हरिहर मिलन का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु के मिलन का स्मरण करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के साथ हर वर्ष यह महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।

देवघर का हरिहर मिलन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है। स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस महोत्सव में शामिल होते हैं, जिससे पूरा नगर भक्ति और रंगों के उल्लास में डूब जाता है।
