वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत ने सस्ते दामों पर उपलब्ध रूसी तेल की खरीद को प्राथमिकता दी है, जिससे देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत के लिए रूस अब कच्चे तेल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए आयात नीति में संतुलन बनाए रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से मिलने वाला तेल अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो रहा है, जिससे भारत के कुल आयात बिल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल आयात में लगातार बढ़ोतरी की है, जिसके चलते अन्य पारंपरिक तेल आपूर्तिकर्ता देशों से आयात में गिरावट देखी गई है। यह रणनीतिक कदम भारत के लिए आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो रहा है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

बताया जा रहा है कि फरवरी महीने में रूस से भारत को मिलने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति में और इजाफा हो सकता है। अनुमान है कि यह आपूर्ति प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल तक पहुंच सकती है, जो नवंबर 2019 के बाद का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। इससे देश के ऊर्जा भंडार को मजबूत करने में मदद मिलेगी और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की यह नीति न केवल आर्थिक रूप से व्यावहारिक है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच सस्ते और स्थिर स्रोतों से तेल की आपूर्ति बनाए रखना देश के लिए रणनीतिक दृष्टि से आवश्यक है।

आने वाले समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत होने की संभावना है, जिससे भारत की ऊर्जा नीति को और अधिक स्थायित्व मिल सकता है। यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण रखने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
