झारखंड में पिछले एक दशक से सरकारी नियुक्ति प्रक्रियाएं लगातार कानूनी विवादों में फंसती जा रही हैं, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों के बावजूद समय पर नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं या तो रद्द हो चुकी हैं या उनके परिणाम लंबे समय से लंबित हैं।

राज्य में कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली कई परीक्षाएं अदालतों में चल रहे मामलों के कारण प्रभावित हुई हैं। परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं, आरक्षण विवादों और अन्य प्रशासनिक कारणों से नियुक्ति प्रक्रियाएं बाधित हो रही हैं। इसका खामियाजा सीधे तौर पर उन अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जो वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे हैं।

प्रशिक्षित सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा के तहत वर्ष 2023 में 26,001 पदों के लिए आवेदन लिए गए थे। परीक्षा 2024 में आयोजित किए जाने की योजना थी, लेकिन मामला अदालत में पहुंचने के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई। इसके अलावा हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति का मामला भी लंबे समय से लंबित है। 2016 में आवेदन आमंत्रित किए गए थे और 2017 में परीक्षा आयोजित हुई थी, लेकिन अब तक अंतिम नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

सीजीएल प्रतियोगिता परीक्षा 2015 के अंतर्गत भी चयन प्रक्रिया में विलंब देखने को मिला है। वर्ष 2023 में फिर से परीक्षा आयोजित कराई गई, लेकिन इसके परिणाम जारी होने में देरी हो रही है। कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा भी इस बीच समाप्त हो चुकी है, जिससे उनकी सरकारी नौकरी पाने की उम्मीदें प्रभावित हुई हैं।

नियुक्ति प्रक्रियाओं में हो रही देरी के कारण कई अभ्यर्थी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। समय पर नियुक्ति नहीं होने से अनेक उम्मीदवार सेवा में आने से पहले ही सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचने की स्थिति में हैं। वहीं कुछ अभ्यर्थियों को सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा का भी सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका नकारात्मक प्रभाव राज्य के प्रशासनिक ढांचे और युवाओं के रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा। अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
