🔎 कहानी की शुरुआत: बिना ब्रेक के 7 दिन काम

आज का रविवार सुकून और परिवार के नाम होता है, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौर में ऐसा नहीं था। खासकर मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) की कपड़ा मिलों में मजदूरों को सप्ताह के सातों दिन बिना रुके काम करना पड़ता था।

इसी दौर में मजदूरों के लिए आवाज़ बने Narayan Meghaji Lokhande। उन्होंने 1881 से 1884 के बीच मजदूरों के अधिकारों के लिए आंदोलन शुरू किया।

📌 सात साल का संघर्ष
लगातार विरोध, ज्ञापन और एकजुटता के बाद आखिरकार 10 जून 1890 को ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और रविवार को आधिकारिक साप्ताहिक अवकाश घोषित किया गया।
⛪ रविवार ही क्यों चुना गया?
1️⃣ धार्मिक कारण
ब्रिटिश शासक ईसाई धर्म को मानते थे और रविवार चर्च जाने का दिन माना जाता था।
इसलिए प्रशासनिक रूप से रविवार को छुट्टी घोषित करना उनके लिए सहज था।
2️⃣ भारतीय परंपरा का तर्क
भारतीय संस्कृति में रविवार को सूर्य देव और कुछ क्षेत्रों में भगवान खंडोबा को समर्पित माना जाता है।
इसलिए मजदूरों को पूजा और विश्राम के लिए इस दिन अवकाश देने का तर्क भी दिया गया।
रविवार की छुट्टी की परंपरा भारत में शुरू नहीं हुई।
साल 321 ईस्वी में रोमन सम्राट Constantine the Great ने पूरे रोमन साम्राज्य में रविवार को आराम का दिन घोषित किया था।
यह परंपरा यूरोप से ब्रिटेन और फिर ब्रिटिश शासन के जरिए भारत तक पहुंची।
📢 निष्कर्ष
रविवार की छुट्टी केवल एक आराम का दिन नहीं, बल्कि मजदूरों के संघर्ष और ऐतिहासिक बदलाव की निशानी है।
आज जब हम वीकेंड का आनंद लेते हैं, तो उसके पीछे छिपे इस लंबे संघर्ष और इतिहास को याद रखना भी ज़रूरी है।