लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को सरकार पास नहीं करा सकी। लंबी बहस और वोटिंग के बाद यह बिल 54 वोटों से गिर गया, जिससे केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है।

संसद में कुल 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया। बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। हालांकि, इस विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी, जो सरकार जुटाने में असफल रही।

क्या था बिल में प्रावधान?

इस संविधान संशोधन बिल में लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने का रास्ता भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था।
सरकार का तर्क था कि बढ़ी हुई सीटों के साथ महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा, लेकिन विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर कई आपत्तियां जताईं।
क्यों नहीं पास हो पाया बिल?
राजनीतिक समीकरण इस बिल के खिलाफ जाते दिखे। एनडीए के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद वह विपक्ष को साथ लाने में नाकाम रही।
सरकार को मिले: 298 वोट
विरोध में पड़े: 230 वोट
जरूरी थे: 352 वोट
यानी सरकार 54 वोटों से पीछे रह गई।
विपक्ष ने क्या उठाए सवाल?
विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का सीधे विरोध नहीं किया, लेकिन परिसीमन को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं।
मुख्य आपत्तियां:
दक्षिणी राज्यों की सीटों में संभावित कमी
जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व में असंतुलन
ओबीसी और अन्य वर्गों के हितों को लेकर सवाल
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि यह बिल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम था। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में कहा कि परिसीमन से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा, बल्कि सभी राज्यों को सीटों में बढ़ोतरी मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने भी विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार श्रेय लेने को तैयार नहीं है, बस बिल पास होना चाहिए।
क्या होगा आगे?
अब इस बिल के गिरने के बाद महिला आरक्षण के लागू होने में देरी तय मानी जा रही है।
नई जनगणना के बाद ही परिसीमन संभव
2029 चुनाव में लागू होना मुश्किल
2034 तक टल सकता है आरक्षण
सरकार भविष्य में संशोधन के साथ बिल दोबारा पेश कर सकती है और विपक्ष से सहमति बनाने की कोशिश करेगी।
ऐतिहासिक मायने
यह पिछले कई वर्षों में पहला मौका है जब केंद्र सरकार लोकसभा में कोई महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं करा पाई। इससे संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव की तस्वीर भी साफ होती है।