पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हुए बवाल ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। फरक्का क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक मणिरुल इस्लाम के खिलाफ आखिरकार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उन पर आरोप है कि मतदाता सूची के ड्राफ्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान एक केंद्र पर उनके समर्थकों ने हंगामा और तोड़फोड़ की।

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया था कि गुरुवार शाम पाँच बजे तक नामजद एफआईआर दर्ज की जाए और इसकी रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए। हालांकि तय समय बीत जाने के करीब 48 घंटे बाद कार्रवाई हुई। देरी से नाराज़ आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद शनिवार दोपहर प्रशासन सक्रिय हुआ और मामला दर्ज किया गया।

विधायक ने आरोपों को बताया ‘साजिश’

मणिरुल इस्लाम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उनका कहना है कि वे केवल जनता की समस्याओं को उठाने गए थे। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि आवाज उठाने के लिए जेल जाना पड़े, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया।

भाजपा ने की गिरफ्तारी की मांग

दूसरी तरफ भाजपा ने इस घटनाक्रम को कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए विधायक की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उल्लेखनीय है कि 14 जनवरी को हुई इस घटना के बाद दर्ज की गई प्रारंभिक एफआईआर में मुख्य आरोपियों के नाम शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल खड़े हुए थे।

दो जिलों में कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल, आयोग ने जताई नाराज़गी
चुनाव आयोग केवल मुर्शिदाबाद ही नहीं, बल्कि उत्तर दिनाजपुर जिले की एक घटना को लेकर भी असंतोष में है। इटाहार में सुनवाई केंद्र पर हुई तोड़फोड़ के मामले में मांगी गई रिपोर्ट अब तक नहीं भेजी गई है। आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि सुनवाई प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने में देरी या निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इससे यह साफ है कि आयोग इस बार SIR प्रक्रिया को लेकर कोई ढिलाई नहीं चाहता।
विपक्ष का हमला, केंद्रीय बलों की मांग
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बार-बार बाधाएं डाली जा रही हैं और आयोग को अधिक सख्ती दिखानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सुनवाई केंद्रों पर केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की है।