पैरों में बेचैनी और झनझनाहट हो सकती है Restless Legs Syndrome का संकेत, मामूली समझने की न करें गलती

Lifestyle February 28, 2026 By Mrityunejay Malviya
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क्या आप रात को बिस्तर पर लेटते ही पैरों में अजीब-सी झनझनाहट, खिंचाव या रेंगने जैसा एहसास महसूस करते हैं? क्या आपको ऐसा लगता है कि जब तक आप पैर हिलाते या थोड़ा टहलते नहीं, तब तक चैन नहीं मिलता?

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अगर हां, तो यह केवल दिनभर की थकान नहीं हो सकती। विशेषज्ञों के अनुसार यह रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS) का संकेत हो सकता है — एक न्यूरोलॉजिकल समस्या, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

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गुड़गांव स्थित न्यूरोमेट वेलनेस केयर के न्यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. भूपेश कुमार मनसुखानी के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से आराम की स्थिति में या रात के समय ज्यादा परेशान करती है।

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आखिर क्यों होती है पैरों में यह बेचैनी?

हमारे शरीर की गतिविधियों को मस्तिष्क और नसें नियंत्रित करती हैं। मस्तिष्क में मौजूद ‘डोपामिन’ नामक रसायन मांसपेशियों की हरकतों को नियंत्रित करता है। जब इस रसायन का संतुलन बिगड़ता है, तो पैरों में अनियंत्रित हरकत, झनझनाहट और बेचैनी होने लगती है।

कई मामलों में आयरन की कमी भी डोपामिन के संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जिससे यह समस्या बढ़ जाती है।

किन बीमारियों से हो सकता है संबंध?

डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या कई बार अन्य गंभीर स्थितियों का संकेत भी हो सकती है, जैसे:

पार्किंसंस डिजीज

आयरन की कमी (एनीमिया)

किडनी की समस्या

डायबिटीज

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव

अगर परिवार में पहले किसी को न्यूरोलॉजिकल बीमारी रही हो तो जोखिम और बढ़ सकता है।

रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है असर

पैरों की लगातार बेचैनी के कारण व्यक्ति ठीक से सो नहीं पाता। नींद अधूरी रहने से कई अन्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं, जैसे:

दिनभर थकान महसूस होना

चिड़चिड़ापन

ध्यान केंद्रित करने में परेशानी

मानसिक तनाव

कई लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज करते हैं, लेकिन लंबे समय में यह लाइफस्टाइल और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकता है।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, कई हफ्तों या महीनों से बनी हुई है, या आपकी नींद लगातार प्रभावित हो रही है — तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।

समय पर पहचान और सही इलाज से RLS के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या है बचाव और इलाज?

✔ शरीर में आयरन लेवल की जांच कराएं

✔ डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन करें

✔ नियमित हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें

✔ कैफीन और शराब का सेवन कम करें

✔ सोने का नियमित समय तय करें

✔ स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें

विशेषज्ञों का मानना है कि सही जीवनशैली अपनाकर और समय पर इलाज कराकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।

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