ईरान-इज़राइल तनाव: कांग्रेस का हमला, विदेश नीति पर सवाल

Political March 2, 2026 By Mrityunejay Malviya
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ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के कथित सैन्य हमले को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे भारत के सिद्धांतों से “विश्वासघात” बताया है।

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प्रियंका गांधी का बयान

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प्रियंका गांधी वाड्रा ने ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन और वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु देश के नेतृत्व की टारगेटेड हत्या और निर्दोष नागरिकों की मौत “घिनौनी” है और इसकी वैश्विक स्तर पर आलोचना होनी चाहिए।

उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा, “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।”

साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्य-पूर्व में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

जयराम रमेश का आरोप

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि “स्वयंभू विश्वगुरु” की छवि के बावजूद भारत की विदेश नीति बेनकाब हो चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 25–26 फरवरी 2026 को पीएम मोदी का इज़राइल दौरा ऐसे समय हुआ जब वैश्विक स्तर पर ईरान पर संभावित हमले की चर्चा थी, और दौरे के दो दिन बाद ही सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई।

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार पाकिस्तान से नज़दीकियां बढ़ा रहे हैं, जो भारत की रणनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है।

कांग्रेस के मुख्य आरोप

सरकार ने ईरान हमले पर स्पष्ट और संतुलित रुख नहीं लिया।

विदेश नीति भारत के मूल्यों और गुटनिरपेक्ष परंपरा से भटक गई है।

अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ती नज़दीकी का खामियाज़ा भारत को कूटनीतिक रूप से उठाना पड़ सकता है।

ट्रेड डील और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सरकार की चुप्पी चिंता पैदा करती है।

राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

ईरान-इज़राइल संघर्ष का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। तेल कीमतों, भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं, ऐसे में किसी भी प्रकार का सैन्य विस्तार भारत के लिए बड़ा मानवीय और आर्थिक संकट बन सकता है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह स्पष्ट रूप से युद्ध का विरोध करे, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की पहल करे और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।

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