हर साल 3 मार्च को World Health Organization (WHO) द्वारा World Hearing Day मनाया जाता है, ताकि लोगों को सुनने की सेहत के प्रति जागरूक किया जा सके।

WHO की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में वर्तमान में करीब 43 करोड़ लोग बहरेपन या गंभीर श्रवण समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें 3 करोड़ से अधिक बच्चे शामिल हैं।

चिंताजनक बात यह है कि साल 2050 तक यह संख्या बढ़कर 70 करोड़ से अधिक हो सकती है—यानि उस समय हर 10 में से 1 व्यक्ति को सुनने में गंभीर दिक्कत होगी।
🔍 क्या है इस संकट का सबसे बड़ा कारण?
WHO के मुताबिक, सुनने की समस्या का कारण सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी गलत आदतें भी जिम्मेदार हैं।
🔊 1. अत्यधिक शोर (Noise Pollution)
तेज म्यूजिक, हेडफोन का अधिक इस्तेमाल
ट्रैफिक, इंडस्ट्रियल एरिया और फैक्ट्री का शोर
लगातार तेज आवाजें हमारे कान की नसों को नुकसान पहुंचाती हैं।
🧪 2. ओटोटॉक्सिक (Ototoxic) केमिकल्स
कुछ इंडस्ट्रियल केमिकल और दवाएं कान की नसों को प्रभावित कर सकती हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना खतरनाक हो सकता है।
👂 3. कान के संक्रमण का समय पर इलाज न होना
बार-बार होने वाले इयर इंफेक्शन या उनका सही इलाज न करवाना भी सुनने की क्षमता कम कर सकता है।
📊 क्यों बढ़ रहा है खतरा?
युवाओं में लंबे समय तक ईयरफोन का उपयोग
तेज वॉल्यूम में म्यूजिक सुनना
शहरीकरण और बढ़ता ध्वनि प्रदूषण
नियमित श्रवण जांच न कराना
WHO का कहना है कि अगर अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले वर्षों में यह एक बड़ा वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन सकता है।
🛑 कैसे करें बचाव?
✔️ 60-60 नियम अपनाएं (60% वॉल्यूम, 60 मिनट से ज्यादा नहीं)
✔️ शोर वाली जगहों पर इयर प्रोटेक्शन का उपयोग करें
✔️ कान में संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें
✔️ साल में कम से कम एक बार श्रवण परीक्षण कराएं
📌 विशेषज्ञों की सलाह
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखना हमारी जीवनशैली पर निर्भर करता है। छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी समस्या से बचा सकती हैं।