देश को टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान कर वहां के प्रत्येक व्यक्ति की अनिवार्य स्क्रीनिंग सुनिश्चित करना है, ताकि बीमारी को समय रहते रोका जा सके।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीबी के खिलाफ यह एक निर्णायक लड़ाई है, जिसमें सरकार और समाज दोनों की भागीदारी जरूरी है। अभियान के तहत विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा, जहां टीबी के मरीजों की संख्या अधिक है या जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं।

🔍 क्या है अभियान की खासियत?

उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान कर विशेष निगरानी
हर व्यक्ति की अनिवार्य स्क्रीनिंग
मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा
घर-घर जाकर जागरूकता अभियान
स्कूलों और कॉलेजों में रैली व जागरूकता कार्यक्रम
इस मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, यदि समय पर पहचान और इलाज किया जाए। उन्होंने लोगों से अपील की कि खांसी, बुखार या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज पूरा करें।
🚨 जागरूकता ही बचाव
कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा टीबी मरीजों को पोषण सहायता और मुफ्त दवाइयां दी जा रही हैं, ताकि इलाज में कोई बाधा न आए।
इस अभियान से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में टीबी के मामलों में कमी आएगी और देश टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।