सियोल: दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति Yoon Suk Yeol को देश से बगावत और जबरन मार्शल लॉ लागू करने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उम्रकैद को उचित ठहराया।

फैसला सुनाते हुए जज जी कुई-योन ने कहा कि यून ने सैन्य और पुलिस बलों का दुरुपयोग करते हुए नेशनल असेंबली पर अवैध कब्जे की कोशिश की, राजनेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बनाई और निरंकुश सत्ता स्थापित करने का प्रयास किया। यून इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकते हैं।

लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा: अभियोजन पक्ष

विशेष अभियोजक ने दलील दी थी कि यह कदम दक्षिण कोरिया के लोकतंत्र के लिए सीधा खतरा था, इसलिए मृत्युदंड दिया जाना चाहिए। हालांकि विश्लेषकों का मानना था कि चूंकि इस घटना में व्यापक जनहानि नहीं हुई, इसलिए उम्रकैद पर्याप्त सजा है।

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी भी दोषी को फांसी नहीं दी गई है।

पूर्व रक्षा मंत्री को भी 30 साल की सजा

अदालत ने मार्शल लॉ लागू करने की योजना में शामिल पूर्व रक्षा मंत्री Kim Yong Hyun को 30 साल की सजा सुनाई। उन पर सेना को सक्रिय करने और योजना तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाने का आरोप था।
सियोल सेंट्रल कोर्ट ने यून की कैबिनेट के अन्य सदस्यों को भी दोषी ठहराया। पूर्व प्रधानमंत्री Han Duck-soo को 23 साल की सजा सुनाई गई। उन पर आदेश को वैध ठहराने की कोशिश, रिकॉर्ड में हेरफेर और शपथ के तहत झूठ बोलने का आरोप था। हान ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।
2024 में लागू हुआ था मार्शल लॉ
दिसंबर 2024 में यून ने देश में करीब छह घंटे के लिए मार्शल लॉ लागू किया था। उन्होंने इसे “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” को रोकने के लिए आवश्यक कदम बताया था।
हालांकि सांसदों ने सैन्य घेराबंदी तोड़कर संसद भवन में प्रवेश किया और सर्वसम्मति से मार्शल लॉ को निरस्त कर दिया। 14 दिसंबर 2024 को संसद में महाभियोग पारित होने के बाद यून को पद से निलंबित कर दिया गया था। अप्रैल 2025 में संवैधानिक अदालत ने उन्हें औपचारिक रूप से पद से हटा दिया।
जुलाई 2025 से वे विभिन्न आपराधिक मामलों में हिरासत में हैं। पिछले महीने उन्हें मार्शल लॉ घोषणा से जुड़े एक अन्य मामले में पांच साल की अलग सजा भी सुनाई गई थी।
अदालत परिसर के बाहर प्रदर्शन
फैसले के दौरान सियोल में अदालत परिसर के बाहर यून के समर्थकों ने प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
यह फैसला दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, जहां पूर्व राष्ट्रपति को लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के आरोप में कड़ी सजा मिली है।