झारखंड सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए एक अहम पहल की है। अब राज्य में उत्पादित करंज और साल के बीज को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है।

सरकार की इस योजना के तहत राज्य भर के किसानों से करंज और साल के बीजों का संग्रह किया जाएगा और उन्हें प्रोसेस कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाएगा। इससे न केवल किसानों को बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी।

जानकारी के अनुसार, करंज बीज का उपयोग औषधीय और जैविक उत्पादों में होता है, वहीं साल बीज से कॉस्मेटिक और खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने इसे बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का फैसला लिया है।

इस पहल के तहत किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे बीजों की गुणवत्ता बनाए रखें और बेहतर उत्पादन कर सकें। साथ ही, सहकारिता विभाग के अधिकारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे संग्रहण और प्रोसेसिंग की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य हर साल करीब 3000 टन साल बीज का संग्रह और निर्यात करना है। इसके अलावा, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत न मिले, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आदिवासी क्षेत्रों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यह पहल झारखंड के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।