झारखंड के देवघर जिले से प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। जिला परिषद के खातों में करीब 6 करोड़ रुपये पड़े हुए हैं, लेकिन इनका उपयोग न होने के कारण जिले के विकास कार्यों पर ब्रेक लग गया है।

जानकारी के अनुसार, यह राशि 15वें वित्त आयोग के तहत मिली है, जिसमें टाइड (निर्धारित) और अनटाइड (अनिर्धारित) फंड शामिल हैं। इन पैसों का उपयोग पंचायत स्तर पर पेयजल, स्वच्छता, सड़क निर्माण, सामुदायिक भवन और अन्य जरूरी विकास कार्यों के लिए किया जाना था।

हालांकि, वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद जिला परिषद को यह फंड प्राप्त हुआ, लेकिन अब तक इसका सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि कई योजनाएं कागजों तक ही सीमित हैं और जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं और अधिकारियों की धीमी प्रक्रिया के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित हो रहा है और स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि योजनाओं को जल्द ही स्वीकृति देकर कार्य शुरू किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है और सरकार से मांग की है कि फंड का सही समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।