चैती नवरात्र के पावन अवसर पर बाबा नगरी देवघर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गई है। नवरात्र की प्रतिपदा तिथि पर शहर के विभिन्न देवी मंदिरों और पूजा मंडपों में विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने माता रानी से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। पूजा स्थलों को आकर्षक सजावट से सजाया गया है और पूरे क्षेत्र में भक्ति गीतों तथा दुर्गा सप्तशती पाठ की गूंज सुनाई दे रही है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की विशेष पूजा अर्चना की गई, जिसे शक्ति उपासना का प्रारंभ माना जाता है।

अखंड दीप और संकल्प पूजा का आयोजन

देवघर के बाबा मंदिर सहित कई देवी मंदिरों में संकल्प पूजा के साथ अखंड दीप जलाए गए। श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास, पूजा और पाठ के माध्यम से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
शहर के विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी देवी मंडपों में विशेष पूजा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिर समितियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
नौ दिनों तक चलेगा महापर्व
चैत्र नवरात्र वर्ष की पहली नवरात्रि मानी जाती है, जो नौ दिनों तक चलती है और रामनवमी के साथ इसका समापन होता है। इस दौरान प्रतिदिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त संयम, साधना एवं सेवा के माध्यम से शक्ति उपासना करते हैं।